राजस्थान और मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावी माहौल के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह की झूठी और आधी-अधूरी जानकारी देने वाली ख़बरें फैलाई जा रही है.
ऐसी ऐसी झूठी या सच्ची ख़बरों का सच पता लगाने के लिए एक ख़ास प्रोजेक्ट शुरु किया गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है 'एकता न्यूज़रूम'.
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया के ज़रिए कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इस प्रोजेक्ट के ज़रिए इन्हीं की पड़ताल कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की गई है.
कांग्रेस ने तोड़े मंदिर- फ़ेक
दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले कुछ फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में एक भड़काऊ संदेश शेयर किया जा रहा है. इस संदेश में एक विध्वस्त मंदिर की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर दिखाई जा रही है.
तस्वीर के नीचे लिखा है, "कांग्रेस ने कश्मीर, केरल और बंगाल में लाखों मंदिर तोड़े हैं. परंतु हिंदू भूल चुका है और वो आज भी कांग्रेस को वोट देता है. ये हिंदुओं की कमज़ोरी है."
राजस्थान की राजधानी जयपुर से दक्षिण में स्थित टोंक क़स्बे से एक शख़्स ने मंगलवार को ये संदेश व्हॉट्सऐप के ज़रिए 'एकता न्यूज़रूम' के साथ शेयर किया था.
इस संदेश में ये भी लिखा था कि बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के कारण भारतीय मुसलमान भाजपा से नाराज़ रहते हैं और उनका वोट कभी भाजपा को नहीं जाता.
संदेश भेजने वाले व्यक्ति का सवाल था कि इस बात में कितनी सच्चाई है और ये तस्वीर असल में कहाँ की है?
पड़ताल में सामने आया सच
राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.
प्रदेश में किशनपोल, आदर्श नगर और टोंक समेत कुछ विधानसभाएं ऐसी हैं जहाँ मुस्लिम वोटरों की संख्या ज़्यादा है और वो सियासी खेल बदल सकते हैं. साथ ही माना जाता है कि मकराना, फ़तेहपुर, चुरू और बाड़मेर में धार्मिक कार्ड काम कर सकता है.
वहीं टोंक विधानसभा सीट से भाजपा के अकेले मुस्लिम उम्मीदवार युनुस ख़ान चुनावी मैदान में हैं.
तस्वीर की पड़ताल करने पर हमने पाया कि ये तस्वीर और संदेश फ़ेसबुक के कुछ क्लोज़ ग्रुप्स में भी शेयर किया जा रहा है.
एकता न्यूज़रूम को टोंक क़स्बे के व्यक्ति ने जो संदेश भेजा था, उसमें तो कोई सच्चाई नहीं थी. लेकिन टूटे हुए मंदिर की तस्वीर की पड़ताल हमने की.
हमने पाया कि ये तस्वीर पाकिस्तान के लाहौर में गिराये गए जैन मंदिर की है और इस तस्वीर को आठ दिसंबर 1992 को लिया गया था.
बीते साल आठ दिसंबर को बीबीसी ने पाकिस्तान में तोड़े गए हिंदू मंदिरों पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी. उस रिपोर्ट में बीबीसी उर्दू के संवाददाता शिराज़ हसन ने लिखा था कि जब हिंदू कट्टरपंथियों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई थी तो कम ही लोगों ने सोचा होगा कि पड़ोसी देशों में इस पर किस क़िस्म की प्रतिक्रिया होगी.
"लेकिन छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद पाकिस्तान में इसकी प्रतिक्रिया होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. बाबरी मस्जिद के बाद पाकिस्तान में तक़रीबन 100 मंदिर या तो ज़मींदोज़ कर दिये गए या फिर उन्हें भारी नुक़सान पहुँचाया गया था."
आठ दिसंबर, 1992 को लाहौर के एक जैन मंदिर को उन्मादियों ने ढहा दिया था जिसकी तस्वीर अब राजस्थान के चुनावी माहौल में शेयर की जा रही है.
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