Tuesday, October 30, 2018

'मेड इन मुंगेर' पर भारी अवैध हथियारों का धंधा

बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित मुंगेर एक बार फिर अवैध हथियारों की वजह से चर्चा में है.

मुंगेर के एसपी बाबू राम के अनुसार "29 अगस्त को मुंगेर के जमालपुर से तीन एके- 47, 30 मैगज़ीन, पिस्टन आदि के साथ एक युवक पकड़ा गया था."

एसपी बाबू राम का कहना है कि ये हथियार जबलपुर ऑर्डिनेंस डिपो से यहाँ लाये गए थे. मुंगेर से सटे बरदह गाँव में 28 सितंबर को एक कुएं से 12 एके-47 राइफ़लें बरामद की गई थीं.

"अब तक कुल 20 एके-47 राइफ़लें बरामद की गई हैं और इस सिलसिले में 21 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है."

"हथियारों की मांग में भारी बढ़ोतरी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जटिलता की वजह से अवैध हथियारों के कारोबार को बढ़ावा मिला है. बरहद गाँव के अलावा कई संदिग्ध पॉकेट्स की पहचान की गई है. "

गैंग मरते नहीं…
बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉक्टर देवकी नंदन गौतम की राय में "गैंग के सदस्य मरते हैं, गैंग कभी नहीं मरता है."

डॉक्टर गौतम साल 1986 में मुंगेर ज़िले के एसपी रह चुके हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि "साल 1986 के फरवरी महीने में दियारा इलाक़े में एक सर्च ऑपरेशन के दौरान चेकोस्लोवाकिया में बने एके-47 कैलिबर के लगभग 100 कारतूस बरामद किए गए थे. सभी कारतूस उसी साल के बने हुए थे."

ज़ाहिर है कि शस्त्र नगरी मुंगेर में वैध और अवैध हथियार बनाने-बेचने का सिलसिला कम से कम तीन दशक पुराना है.

वैध हथियारों का धंधा मंदा
शहर में वैध हथियारों के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज हुई है जबकि अवैध हथियारों का धंधा तेजी से बढ़ा है.

मुंगेर की तंग गलीनुमा सड़कें रोशन हैं. शहर में बंदूक की 40 दुकानें हैं.

चौक बाज़ार पर एक बंदूक दुकान के मालिक 78 वर्षीय ठाकुर नरेश सिंह हर दिन की तरह ग्राहकों के इंतज़ार में बैठे हैं.

इनकी दुकान पर कभी ख़रीदारों की भीड़ जुटती थी, लेकिन अब सन्नाटा पसरा रहता है.

वे कहते हैं, "पहले हर साल मैं औसतन 100 या उससे अधिक सिंगल-डबल बैरल बंदूकें बेच देता था, लेकिन साल 2000 के बाद से ख़रीदारों की संख्या में बहुत गिरावट आई है. अब हर साल दो या तीन बंदूकें ही बेच पाता हूँ."

गाँव में फैला अवैध हथियारों का धंधा
नरेश सिंह की दुकान से कुछ ही दूरी पर स्थित शहर के मुफ्फसिल और क़ासिम बाज़ार थाने के कई गाँवों में अवैध हथियारों का कारोबार फल-फूल रहा है.

नरेश सिंह सिंगल-डबल बैरल बंदूक की मांग में गिरावट की वजह लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलता और आधुनिक और छोटे हथियारों के प्रति बढ़ते आकर्षण को मानते हैं.

वो कहते हैं कि मुंगेर अवैध हथियारों का गढ़ बन चुका है.

बंदूक निर्माता मेसर्स गिरिलाल एंड कंपनी के मालिक विपिन कुमार शर्मा के अनुसार, "मुंगेर शहर का हथियारों से ऐतिहासिक नाता रहा है. बंगाल के नवाब मीर क़ासिम अली (1760- 63) ने अपने शस्त्रागार के साथ मुर्शिदाबाद को छोड़कर मुंगेर को अपनी राजधानी बना लिया था. नवाब के शस्त्रागार में कुशल कारिगरों की भारी संख्या थी. उनका पारंपरिक कौशल पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा."

एडिलेड टेस्ट में कंगारुओं के आगे जूझ रही भारतीय टीम

एडिलेड में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कमज़ोर रही. सात खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके हैं. दोनों ओपनर लोकेश राहुल ...