एडिलेड में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत कमज़ोर रही. सात खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके हैं.
दोनों ओपनर लोकेश राहुल और मुरली विजय के अलावा कप्तान विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा और ऋषभ पंत आउट हो चुके हैं.
राहुल मात्र दो, विजय 11, कोहली तीन और रहाणे 13 रन बना सके. लंच के बाद रोहित शर्मा (37) और ऋषभ पंत (25) भी आउट हो गए.
लंच के बाद रविचंद्रण अश्विन और पुजारा ने अर्धशतकीय साझेदारी निभाई. पुजारा ने इस दौरान अपना अर्धशतक भी पूरा किया. चाय अवकाश के बाद जब दोनों बल्लेबाज़ पिच पर लौटे तो 62 रनों की साझेदारी निभा कर रविचंद्रण अश्विन आउट हो गए.
अब तक 75 ओवर्स में भारतीय टीम ने सात विकेट के नुकसान पर 190 रन बनाए हैं. पुजारा 77 रन बना कर नाबाद है.
टॉस भारतीय कप्तान विराट कोहली ने जीता और पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया.
भारत ने पहले मैच की टीम में अनुभवी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा को जगह दी है. 25 टेस्ट मैच खेल चुके रोहित शर्मा ने इसके पहले जनवरी में दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ आख़िरी टेस्ट मैच खेला था.
ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सिरीज़ नहीं जीत सका है भारत
भारतीय टीम ने अब तक ऑस्ट्रेलिया में कभी टेस्ट सिरीज़ नहीं जीती है. विराट कोहली की टीम को इस बार जीत का दावेदार माना जा रहा है.
कप्तान कोहली भी इस सिरीज़ को एक मौके के तौर पर देख रहे हैं.
टॉस के बाद कोहली ने कहा, "हर दौरा एक अवसर है. यहां आना एक अलग चुनौती है. हम किसी भी चीज़ को हल्के में नहीं ले रहे हैं."
अवैध हथियारों का धंधा
Wednesday, December 5, 2018
Wednesday, November 28, 2018
कांग्रेस के 'मंदिर तोड़ने वाली तस्वीर' का पाकिस्तान कनेक्शन
राजस्थान और मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावी माहौल के दौरान सोशल मीडिया पर कई तरह की झूठी और आधी-अधूरी जानकारी देने वाली ख़बरें फैलाई जा रही है.
ऐसी ऐसी झूठी या सच्ची ख़बरों का सच पता लगाने के लिए एक ख़ास प्रोजेक्ट शुरु किया गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है 'एकता न्यूज़रूम'.
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया के ज़रिए कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इस प्रोजेक्ट के ज़रिए इन्हीं की पड़ताल कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की गई है.
कांग्रेस ने तोड़े मंदिर- फ़ेक
दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले कुछ फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में एक भड़काऊ संदेश शेयर किया जा रहा है. इस संदेश में एक विध्वस्त मंदिर की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर दिखाई जा रही है.
तस्वीर के नीचे लिखा है, "कांग्रेस ने कश्मीर, केरल और बंगाल में लाखों मंदिर तोड़े हैं. परंतु हिंदू भूल चुका है और वो आज भी कांग्रेस को वोट देता है. ये हिंदुओं की कमज़ोरी है."
राजस्थान की राजधानी जयपुर से दक्षिण में स्थित टोंक क़स्बे से एक शख़्स ने मंगलवार को ये संदेश व्हॉट्सऐप के ज़रिए 'एकता न्यूज़रूम' के साथ शेयर किया था.
इस संदेश में ये भी लिखा था कि बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के कारण भारतीय मुसलमान भाजपा से नाराज़ रहते हैं और उनका वोट कभी भाजपा को नहीं जाता.
संदेश भेजने वाले व्यक्ति का सवाल था कि इस बात में कितनी सच्चाई है और ये तस्वीर असल में कहाँ की है?
पड़ताल में सामने आया सच
राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.
प्रदेश में किशनपोल, आदर्श नगर और टोंक समेत कुछ विधानसभाएं ऐसी हैं जहाँ मुस्लिम वोटरों की संख्या ज़्यादा है और वो सियासी खेल बदल सकते हैं. साथ ही माना जाता है कि मकराना, फ़तेहपुर, चुरू और बाड़मेर में धार्मिक कार्ड काम कर सकता है.
वहीं टोंक विधानसभा सीट से भाजपा के अकेले मुस्लिम उम्मीदवार युनुस ख़ान चुनावी मैदान में हैं.
तस्वीर की पड़ताल करने पर हमने पाया कि ये तस्वीर और संदेश फ़ेसबुक के कुछ क्लोज़ ग्रुप्स में भी शेयर किया जा रहा है.
एकता न्यूज़रूम को टोंक क़स्बे के व्यक्ति ने जो संदेश भेजा था, उसमें तो कोई सच्चाई नहीं थी. लेकिन टूटे हुए मंदिर की तस्वीर की पड़ताल हमने की.
हमने पाया कि ये तस्वीर पाकिस्तान के लाहौर में गिराये गए जैन मंदिर की है और इस तस्वीर को आठ दिसंबर 1992 को लिया गया था.
बीते साल आठ दिसंबर को बीबीसी ने पाकिस्तान में तोड़े गए हिंदू मंदिरों पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी. उस रिपोर्ट में बीबीसी उर्दू के संवाददाता शिराज़ हसन ने लिखा था कि जब हिंदू कट्टरपंथियों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई थी तो कम ही लोगों ने सोचा होगा कि पड़ोसी देशों में इस पर किस क़िस्म की प्रतिक्रिया होगी.
"लेकिन छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद पाकिस्तान में इसकी प्रतिक्रिया होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. बाबरी मस्जिद के बाद पाकिस्तान में तक़रीबन 100 मंदिर या तो ज़मींदोज़ कर दिये गए या फिर उन्हें भारी नुक़सान पहुँचाया गया था."
आठ दिसंबर, 1992 को लाहौर के एक जैन मंदिर को उन्मादियों ने ढहा दिया था जिसकी तस्वीर अब राजस्थान के चुनावी माहौल में शेयर की जा रही है.
ऐसी ऐसी झूठी या सच्ची ख़बरों का सच पता लगाने के लिए एक ख़ास प्रोजेक्ट शुरु किया गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है 'एकता न्यूज़रूम'.
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया के ज़रिए कुछ वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इस प्रोजेक्ट के ज़रिए इन्हीं की पड़ताल कर सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की गई है.
कांग्रेस ने तोड़े मंदिर- फ़ेक
दक्षिणपंथी रुझान रखने वाले कुछ फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स में एक भड़काऊ संदेश शेयर किया जा रहा है. इस संदेश में एक विध्वस्त मंदिर की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर दिखाई जा रही है.
तस्वीर के नीचे लिखा है, "कांग्रेस ने कश्मीर, केरल और बंगाल में लाखों मंदिर तोड़े हैं. परंतु हिंदू भूल चुका है और वो आज भी कांग्रेस को वोट देता है. ये हिंदुओं की कमज़ोरी है."
राजस्थान की राजधानी जयपुर से दक्षिण में स्थित टोंक क़स्बे से एक शख़्स ने मंगलवार को ये संदेश व्हॉट्सऐप के ज़रिए 'एकता न्यूज़रूम' के साथ शेयर किया था.
इस संदेश में ये भी लिखा था कि बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के कारण भारतीय मुसलमान भाजपा से नाराज़ रहते हैं और उनका वोट कभी भाजपा को नहीं जाता.
संदेश भेजने वाले व्यक्ति का सवाल था कि इस बात में कितनी सच्चाई है और ये तस्वीर असल में कहाँ की है?
पड़ताल में सामने आया सच
राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है.
प्रदेश में किशनपोल, आदर्श नगर और टोंक समेत कुछ विधानसभाएं ऐसी हैं जहाँ मुस्लिम वोटरों की संख्या ज़्यादा है और वो सियासी खेल बदल सकते हैं. साथ ही माना जाता है कि मकराना, फ़तेहपुर, चुरू और बाड़मेर में धार्मिक कार्ड काम कर सकता है.
वहीं टोंक विधानसभा सीट से भाजपा के अकेले मुस्लिम उम्मीदवार युनुस ख़ान चुनावी मैदान में हैं.
तस्वीर की पड़ताल करने पर हमने पाया कि ये तस्वीर और संदेश फ़ेसबुक के कुछ क्लोज़ ग्रुप्स में भी शेयर किया जा रहा है.
एकता न्यूज़रूम को टोंक क़स्बे के व्यक्ति ने जो संदेश भेजा था, उसमें तो कोई सच्चाई नहीं थी. लेकिन टूटे हुए मंदिर की तस्वीर की पड़ताल हमने की.
हमने पाया कि ये तस्वीर पाकिस्तान के लाहौर में गिराये गए जैन मंदिर की है और इस तस्वीर को आठ दिसंबर 1992 को लिया गया था.
बीते साल आठ दिसंबर को बीबीसी ने पाकिस्तान में तोड़े गए हिंदू मंदिरों पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी. उस रिपोर्ट में बीबीसी उर्दू के संवाददाता शिराज़ हसन ने लिखा था कि जब हिंदू कट्टरपंथियों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई थी तो कम ही लोगों ने सोचा होगा कि पड़ोसी देशों में इस पर किस क़िस्म की प्रतिक्रिया होगी.
"लेकिन छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद पाकिस्तान में इसकी प्रतिक्रिया होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा. बाबरी मस्जिद के बाद पाकिस्तान में तक़रीबन 100 मंदिर या तो ज़मींदोज़ कर दिये गए या फिर उन्हें भारी नुक़सान पहुँचाया गया था."
आठ दिसंबर, 1992 को लाहौर के एक जैन मंदिर को उन्मादियों ने ढहा दिया था जिसकी तस्वीर अब राजस्थान के चुनावी माहौल में शेयर की जा रही है.
Monday, November 26, 2018
निक संग शादी की तैयारियां शुरू, दुल्हन सा सजा प्रियंका का घर
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस इस साल दिसंबर में शादी के बंधन में बंध सकते हैं. खबर के मुताबिक दोनों इसी साल 2 दिसंबर को जोधपुर में 7 फेरे ले सकते हैं. शादी की तैयारियां शुरू हो गई हैं. निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा कई बार शादी के लिए खरीददारी करते और लोकेशन फाइनल करने के लिए घूमते देखे जा चुके हैं. अब प्रियंका के घर की सजावट भी हो गई है.
सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिन्हें प्रियंका चोपड़ा के घर की तस्वीरें बताया जा रहा है. इन तस्वीरों में दुल्हन सा सजा घर नजर आ रहा है. बता दें कि निक जोनस हाल ही में वापस भारत आ गए थे. अब तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रियंका और निक जोधपुर के उमेद भवन पैलेस में शादी कर सकते हैं. खबर है कि दोनों हेलिकॉप्टर से वेडिंग प्लेस तक पहुंचेंगे.
शादी हिंदू और क्रिश्चियन रीति रिवाज से होगी. स्पॉट बॉय के अनुसार, प्रियंका अपनी शादी के दिन उदयपुर जाएंगी, जहां से वे हेलिकॉप्टर से जोधपुर के उम्मैद भवन उतरेंगी. यहां एक हैलीपैड बनाया जाएगा. मेवार हेलिकॉप्टर सर्विसेस ने इस खबर की पुष्टि की है. सूत्रों का कहना है 29 नवंबर और 3 दिसंबर के लिए एक हैलीकॉप्टर बुक किया गया है. ये 29 को उदयपुर से सीधे जोधपुर के उम्मैद पैलेस लैंड करेगा.
शादी हिंदू और क्रिश्चियन रीति रिवाज से होगी. अब खबरें आ रही हैं कि दोनों शादी के बाद दो रिसेप्शन देंगे. दोनों की शादी के रिसेप्शन काफी ग्रैंड होने वाले हैं. जोधपुर में शादी के बाद प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस दो रिसेप्शन देंगे. पहला रिसेप्शन फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के लिए मुंबई में होगा. वहीं दूसरा रिसेप्शन दिल्ली में होगा.
अमिताभ बच्चन ने मेनहोल और सीवरों की हाथों से सफाई करने वाले सफाईकर्मियों की मदद के अपने वादे को पूरा करते हुए उनके लिए मशीनों का इंतजाम किया है.
अमिताभ ने रविवार को ट्वीट कर कहा, "हाथों से सफाई करने वाले कर्मियों की अमानवीय स्थिति को देखते हुए मैंने उनके लिए 50 मशीनें खरीदने का वादा किया था. आज मैंने उस वादे को पूरा कर दिया है! सफाईकर्मियों को 25 छोटी अलग-अलग मशीनें और बीएमसी को एक बड़ी ट्रक मशीन उपहार में दी है."
24 नवंबर को एक पत्र लिखकर अमिताभ ने मैनुअल स्केवेंजर्स एसोसिएशन (एमएसए) और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) से कहा था कि वह मेनहोल और सीवर नालों में सफाई के लिए उनमें उतरने वाले सफाईकर्मियों के लिए कुछ करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "मेरा योगदान सफाईकर्मियों को इस अमानवीय कार्य को करने से रोकने और उन्हें समाज में सम्मान और गरिमा दिलाने के लिए है." अमिताभ ने सफाईकर्मियों के लिए मशीनें खरीदने के लिए 50 लाख रुपये देने का वादा किया था.
अमिताभ ने ट्वीट कर कहा, "मैं बीएमसी को एक बड़ी मशीन और सफाईकर्मियों को छोटी मशीनें दान कर रहा हूं." उन्होंने बीएमसी और एमएसए से मशीनों के सही प्रयोग की निरंतर रिपोर्ट देने का भी आग्रह किया है. अभिनेता किसानों की मदद के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिन्हें प्रियंका चोपड़ा के घर की तस्वीरें बताया जा रहा है. इन तस्वीरों में दुल्हन सा सजा घर नजर आ रहा है. बता दें कि निक जोनस हाल ही में वापस भारत आ गए थे. अब तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रियंका और निक जोधपुर के उमेद भवन पैलेस में शादी कर सकते हैं. खबर है कि दोनों हेलिकॉप्टर से वेडिंग प्लेस तक पहुंचेंगे.
शादी हिंदू और क्रिश्चियन रीति रिवाज से होगी. स्पॉट बॉय के अनुसार, प्रियंका अपनी शादी के दिन उदयपुर जाएंगी, जहां से वे हेलिकॉप्टर से जोधपुर के उम्मैद भवन उतरेंगी. यहां एक हैलीपैड बनाया जाएगा. मेवार हेलिकॉप्टर सर्विसेस ने इस खबर की पुष्टि की है. सूत्रों का कहना है 29 नवंबर और 3 दिसंबर के लिए एक हैलीकॉप्टर बुक किया गया है. ये 29 को उदयपुर से सीधे जोधपुर के उम्मैद पैलेस लैंड करेगा.
शादी हिंदू और क्रिश्चियन रीति रिवाज से होगी. अब खबरें आ रही हैं कि दोनों शादी के बाद दो रिसेप्शन देंगे. दोनों की शादी के रिसेप्शन काफी ग्रैंड होने वाले हैं. जोधपुर में शादी के बाद प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस दो रिसेप्शन देंगे. पहला रिसेप्शन फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के लिए मुंबई में होगा. वहीं दूसरा रिसेप्शन दिल्ली में होगा.
अमिताभ बच्चन ने मेनहोल और सीवरों की हाथों से सफाई करने वाले सफाईकर्मियों की मदद के अपने वादे को पूरा करते हुए उनके लिए मशीनों का इंतजाम किया है.
अमिताभ ने रविवार को ट्वीट कर कहा, "हाथों से सफाई करने वाले कर्मियों की अमानवीय स्थिति को देखते हुए मैंने उनके लिए 50 मशीनें खरीदने का वादा किया था. आज मैंने उस वादे को पूरा कर दिया है! सफाईकर्मियों को 25 छोटी अलग-अलग मशीनें और बीएमसी को एक बड़ी ट्रक मशीन उपहार में दी है."
24 नवंबर को एक पत्र लिखकर अमिताभ ने मैनुअल स्केवेंजर्स एसोसिएशन (एमएसए) और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) से कहा था कि वह मेनहोल और सीवर नालों में सफाई के लिए उनमें उतरने वाले सफाईकर्मियों के लिए कुछ करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "मेरा योगदान सफाईकर्मियों को इस अमानवीय कार्य को करने से रोकने और उन्हें समाज में सम्मान और गरिमा दिलाने के लिए है." अमिताभ ने सफाईकर्मियों के लिए मशीनें खरीदने के लिए 50 लाख रुपये देने का वादा किया था.
अमिताभ ने ट्वीट कर कहा, "मैं बीएमसी को एक बड़ी मशीन और सफाईकर्मियों को छोटी मशीनें दान कर रहा हूं." उन्होंने बीएमसी और एमएसए से मशीनों के सही प्रयोग की निरंतर रिपोर्ट देने का भी आग्रह किया है. अभिनेता किसानों की मदद के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.
Tuesday, October 30, 2018
'मेड इन मुंगेर' पर भारी अवैध हथियारों का धंधा
बिहार की राजधानी पटना से क़रीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित मुंगेर एक बार फिर अवैध हथियारों की वजह से चर्चा में है.
मुंगेर के एसपी बाबू राम के अनुसार "29 अगस्त को मुंगेर के जमालपुर से तीन एके- 47, 30 मैगज़ीन, पिस्टन आदि के साथ एक युवक पकड़ा गया था."
एसपी बाबू राम का कहना है कि ये हथियार जबलपुर ऑर्डिनेंस डिपो से यहाँ लाये गए थे. मुंगेर से सटे बरदह गाँव में 28 सितंबर को एक कुएं से 12 एके-47 राइफ़लें बरामद की गई थीं.
"अब तक कुल 20 एके-47 राइफ़लें बरामद की गई हैं और इस सिलसिले में 21 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है."
"हथियारों की मांग में भारी बढ़ोतरी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जटिलता की वजह से अवैध हथियारों के कारोबार को बढ़ावा मिला है. बरहद गाँव के अलावा कई संदिग्ध पॉकेट्स की पहचान की गई है. "
गैंग मरते नहीं…
बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉक्टर देवकी नंदन गौतम की राय में "गैंग के सदस्य मरते हैं, गैंग कभी नहीं मरता है."
डॉक्टर गौतम साल 1986 में मुंगेर ज़िले के एसपी रह चुके हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि "साल 1986 के फरवरी महीने में दियारा इलाक़े में एक सर्च ऑपरेशन के दौरान चेकोस्लोवाकिया में बने एके-47 कैलिबर के लगभग 100 कारतूस बरामद किए गए थे. सभी कारतूस उसी साल के बने हुए थे."
ज़ाहिर है कि शस्त्र नगरी मुंगेर में वैध और अवैध हथियार बनाने-बेचने का सिलसिला कम से कम तीन दशक पुराना है.
वैध हथियारों का धंधा मंदा
शहर में वैध हथियारों के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज हुई है जबकि अवैध हथियारों का धंधा तेजी से बढ़ा है.
मुंगेर की तंग गलीनुमा सड़कें रोशन हैं. शहर में बंदूक की 40 दुकानें हैं.
चौक बाज़ार पर एक बंदूक दुकान के मालिक 78 वर्षीय ठाकुर नरेश सिंह हर दिन की तरह ग्राहकों के इंतज़ार में बैठे हैं.
इनकी दुकान पर कभी ख़रीदारों की भीड़ जुटती थी, लेकिन अब सन्नाटा पसरा रहता है.
वे कहते हैं, "पहले हर साल मैं औसतन 100 या उससे अधिक सिंगल-डबल बैरल बंदूकें बेच देता था, लेकिन साल 2000 के बाद से ख़रीदारों की संख्या में बहुत गिरावट आई है. अब हर साल दो या तीन बंदूकें ही बेच पाता हूँ."
गाँव में फैला अवैध हथियारों का धंधा
नरेश सिंह की दुकान से कुछ ही दूरी पर स्थित शहर के मुफ्फसिल और क़ासिम बाज़ार थाने के कई गाँवों में अवैध हथियारों का कारोबार फल-फूल रहा है.
नरेश सिंह सिंगल-डबल बैरल बंदूक की मांग में गिरावट की वजह लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलता और आधुनिक और छोटे हथियारों के प्रति बढ़ते आकर्षण को मानते हैं.
वो कहते हैं कि मुंगेर अवैध हथियारों का गढ़ बन चुका है.
बंदूक निर्माता मेसर्स गिरिलाल एंड कंपनी के मालिक विपिन कुमार शर्मा के अनुसार, "मुंगेर शहर का हथियारों से ऐतिहासिक नाता रहा है. बंगाल के नवाब मीर क़ासिम अली (1760- 63) ने अपने शस्त्रागार के साथ मुर्शिदाबाद को छोड़कर मुंगेर को अपनी राजधानी बना लिया था. नवाब के शस्त्रागार में कुशल कारिगरों की भारी संख्या थी. उनका पारंपरिक कौशल पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा."
मुंगेर के एसपी बाबू राम के अनुसार "29 अगस्त को मुंगेर के जमालपुर से तीन एके- 47, 30 मैगज़ीन, पिस्टन आदि के साथ एक युवक पकड़ा गया था."
एसपी बाबू राम का कहना है कि ये हथियार जबलपुर ऑर्डिनेंस डिपो से यहाँ लाये गए थे. मुंगेर से सटे बरदह गाँव में 28 सितंबर को एक कुएं से 12 एके-47 राइफ़लें बरामद की गई थीं.
"अब तक कुल 20 एके-47 राइफ़लें बरामद की गई हैं और इस सिलसिले में 21 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है."
"हथियारों की मांग में भारी बढ़ोतरी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जटिलता की वजह से अवैध हथियारों के कारोबार को बढ़ावा मिला है. बरहद गाँव के अलावा कई संदिग्ध पॉकेट्स की पहचान की गई है. "
गैंग मरते नहीं…
बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉक्टर देवकी नंदन गौतम की राय में "गैंग के सदस्य मरते हैं, गैंग कभी नहीं मरता है."
डॉक्टर गौतम साल 1986 में मुंगेर ज़िले के एसपी रह चुके हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि "साल 1986 के फरवरी महीने में दियारा इलाक़े में एक सर्च ऑपरेशन के दौरान चेकोस्लोवाकिया में बने एके-47 कैलिबर के लगभग 100 कारतूस बरामद किए गए थे. सभी कारतूस उसी साल के बने हुए थे."
ज़ाहिर है कि शस्त्र नगरी मुंगेर में वैध और अवैध हथियार बनाने-बेचने का सिलसिला कम से कम तीन दशक पुराना है.
वैध हथियारों का धंधा मंदा
शहर में वैध हथियारों के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज हुई है जबकि अवैध हथियारों का धंधा तेजी से बढ़ा है.
मुंगेर की तंग गलीनुमा सड़कें रोशन हैं. शहर में बंदूक की 40 दुकानें हैं.
चौक बाज़ार पर एक बंदूक दुकान के मालिक 78 वर्षीय ठाकुर नरेश सिंह हर दिन की तरह ग्राहकों के इंतज़ार में बैठे हैं.
इनकी दुकान पर कभी ख़रीदारों की भीड़ जुटती थी, लेकिन अब सन्नाटा पसरा रहता है.
वे कहते हैं, "पहले हर साल मैं औसतन 100 या उससे अधिक सिंगल-डबल बैरल बंदूकें बेच देता था, लेकिन साल 2000 के बाद से ख़रीदारों की संख्या में बहुत गिरावट आई है. अब हर साल दो या तीन बंदूकें ही बेच पाता हूँ."
गाँव में फैला अवैध हथियारों का धंधा
नरेश सिंह की दुकान से कुछ ही दूरी पर स्थित शहर के मुफ्फसिल और क़ासिम बाज़ार थाने के कई गाँवों में अवैध हथियारों का कारोबार फल-फूल रहा है.
नरेश सिंह सिंगल-डबल बैरल बंदूक की मांग में गिरावट की वजह लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलता और आधुनिक और छोटे हथियारों के प्रति बढ़ते आकर्षण को मानते हैं.
वो कहते हैं कि मुंगेर अवैध हथियारों का गढ़ बन चुका है.
बंदूक निर्माता मेसर्स गिरिलाल एंड कंपनी के मालिक विपिन कुमार शर्मा के अनुसार, "मुंगेर शहर का हथियारों से ऐतिहासिक नाता रहा है. बंगाल के नवाब मीर क़ासिम अली (1760- 63) ने अपने शस्त्रागार के साथ मुर्शिदाबाद को छोड़कर मुंगेर को अपनी राजधानी बना लिया था. नवाब के शस्त्रागार में कुशल कारिगरों की भारी संख्या थी. उनका पारंपरिक कौशल पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा."
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